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- बख्शी ग्रन्थावली-7 - भारतकोश, ज्ञान का हिन्दी महासागर
बख्शी जी निबन्ध कला के सौन्दर्यीकरण के लिए एक ही निबन्ध को अनेक शैलियों में अनेक बार लिखते थे। बख्शी के निबन्धों में स्टीवेंसन
- पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी के निबंधों का अध्ययन
संस्कृति एक जटिल पद है। संस्कृति की अधिकांश व्याख्याएं अमूर्त विवेचनाओं में सिमट जाती हैं। दरअसल संस्कृति अमूर्तन नहीं है
- जानकारी दीजिए:पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी जी के निबंधों की प्रमुख विशेषताएँ
कला के बारे में उनकी भावना उदात्त थी। निम्नलिखित वाक्य में आए हुए शब्दों के वचन परिवर्तन करके वाक्य फिर से लिखिए
- (१) पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी जी के निबंधों की
उपरोक्त उत्तरों में, हमने पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी जी के निबंधों की विशेषताओं, रांगेय राघव जी की प्रमुख रचनाओं, सुदामा पांडेय जी के
- 365 दिन, 365 भावनाएँ: बख्शी जी के गीतों से प्रेरित मेरा आत्म-लेखन
मुझे बचपन से ही अपने माता-पिता ने रामचरितमानस का एक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक माहौल दिया। हमारे घर में हर सुबह भजन, रामायण के पाठ और
- जानकारी दीजिए : (अ) पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी जी के निबंधों की प्रमुख . . .
पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी जी के निबंधों की प्रमुख विशेषताएँ: (1) सरल और स्पष्ट भाषा, (2) सामाजिक मुद्दों पर ध्यान। अन्य निबंधकारों के नाम
- खैरागढ़ से साहित्य के शिखर तक: डॉ. बख्शी का प्रेरक जीवन
बख्शी ने निबंध, आलोचना, उपन्यास, कहानी, यात्रा-वृत्तांत और कविता – सभी विधाओं में महत्वपूर्ण लेखन किया। उनके निबंधों में संवाद की
- पदुमलाल पन्नालाल बख्शी - विकिपीडिया
डॉ॰ पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी (27 मई 1894-28 दिसम्बर 1971) जिन्हें ‘मास्टरजी’ के नाम से भी जाना जाता है, हिंदी के निबंधकार थे। वे राजनांदगांव की
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